Castles in the air - they are so easy to take refuge in. And so easy to build, too.

आम्हां घरी धन शब्दांचीच रत्नें | शब्दांचीच शस्त्रें यत्न करुं ||
शब्द चि आमुच्या जीवांचे जीवन | शब्दें वांटूं धन जनलोकां ||
तुका म्हणे पाहा शब्द चि हा देव | शब्द चि गौरव पूजा करुं ||
- abhang of Tukaram Wolhoba Ambile of Dehu

There's No Freedom Like That of a Child's Imagination

கடலுக்கு உண்டு கற்பனைக்கு இல்லை கட்டுப்பாடு

Thursday, April 08, 2010

Two nazms by Mushahid

आपके दीदार को निकल आये हैं तारे,
आपकी ख़ुशबू से छा गई हैं बहारें,
आपके साथ दिखते हैं कुछ ऐसे नज़ारे,
चुप होके बस चाँद भी आपही को निहारे

मेरे दिल से प्यार का दरिया निकल पड़े,
आँखों से सैलाब ए समन्दर निकल पड़े,
जिऊँगा मैं ऐसे इस जहाँ में कि सूरज
के जिस्म से भी पसीना निकल पड़े
- मुशाहिद अब्बास

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