Castles in the air - they are so easy to take refuge in. And so easy to build, too.

आम्हां घरी धन शब्दांचीच रत्नें | शब्दांचीच शस्त्रें यत्न करुं ||
शब्द चि आमुच्या जीवांचे जीवन | शब्दें वांटूं धन जनलोकां ||
तुका म्हणे पाहा शब्द चि हा देव | शब्द चि गौरव पूजा करुं ||
- abhang of Tukaram Wolhoba Ambile of Dehu

There's No Freedom Like That of a Child's Imagination

கடலுக்கு உண்டு கற்பனைக்கு இல்லை கட்டுப்பாடு

Wednesday, April 08, 2009

तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ

दो पल का साथ फिर ज़िन्दगी तन्हा, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|
दर्द फुग़ान हो जाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

हवाएँ चुपके से कहती हैं कि मिलन की रुत आई तुम कहाँ हो,
पर तुमसे बिछडने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

तुम आओगी, बोलोगी, हँसोगी, बडबडओगी, चली जाओगी,
रुख़सत में तड़पने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

मेरे साँसों में अपनी ख़ुशबू छोड जाओगी, वह बहकाता रहेगा,
उस याद में सिसकने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

घर आओगी तो बातें मत करना, दीवारें सुनकर देर दोहराएँगी,
वह गूँज सुनकर रोने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

किसी चीज़ को हाथ मत लगाना, मेरा इबादतख़ाना भर गया है,
यह इख़लास चूकने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

तुम्हारी याद से पैर ज़मीन पर नहीं टिकते, तुम्हारा दीदार तौबा,
ख़्वाब टूटकर गिर जाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

सोचता हूँ कि तुम्हारा हँसना या रूठना मेरे होश को भुला देगा,
तुमसे बातें करने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

सीरत की कमियाँ तुमसे क्या छुपाऊँ, यह आँखें ढूँड ही लेती हैं,
इन नज़रों में गिरने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

ऐ हसीन यह नाम तुम्हारा, इससे इतराने से नहीं थकते यह होंठ,
यह मिठास पिघलने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

तुम्हारी देहलीज़ पार करके लगता है के जन्नत में दाख़िल हुआ हूँ,
यह ख़्वाबगाह उजड़ जाने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

अपनी तारीफ़ किसी सुख़ानवर से करवाओ, मुझसे तो नहीं होगा,
अल्फ़ाज़ का साथ छूटने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

तुम्हारा हर नुख़्स सोने और चान्दी के वरक़ से छुपाया है मैंने,
यह नक़ाब उतरने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

ख़ानाबदोश को क्या मुकाम हासिल, मंज़िल हाज़िर होते भी हूँ फ़ना,
तुम्हे पाकर खोने का डर इतना, तुमसे मिलने से मुकर जाता हूँ|

1 Comments:

Blogger Ozymandias said...

From Max on SMS:-
'dard barhkar fughaan na ho jaye
ye zameen na aasmaan ho jaye'
- Nida Fazli

2:01 PM, April 08, 2009  

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